RAABTA by Gaurav Lamba

img_6433मैं अब चलता हूँ

मैं अब चलता हूँ मेरी जाँ कि लौटना अब ज़रूरी है,
तेरी बातों के दरिया, अब इससे और नसीब नहीं मिरा,
गुस्ताखियों का हिसाब भी अब चरम लांघ रहा है,

मैं अब चलता हूँ |
तू ये समझ के मैं तेरा हुआ था, पर अब हूँ,
के मैं तेरा ही सदा रह सकना चाहता हूँ,
पर कोई है के जिसका हक़, मुझसे भी ज़्यादा है मुझपर,
कोई है के जिसकी महक मेरी हर सांस में है,

मैं चलता हूँ |
के तुझसे मिलने मैं उससे इजाज़त ले कर आया था,
रुक तो मैं सकता हूँ पर अब वो आवाज़ लगा रही है,
कुछ खूँ  के रंगरेजों ने शायद सताया है उसे,
मेरी जाँजाना ज़रूरी है के मुझसे उसका दुःख देखा नही जाता,

 

के मैं अब चलता हूँ |
शायद कभी लौटूंगातेरी ज़ुल्फ़ों में उलझने फिरसे 
शायद कहींकिसी रुत में, सावन में शायद 
धान के खेतों मेंशायद तेरे खिलॉरे सुनने 
शायद  मैं लौटूंगातुझे  अपना बनाने 

मैं अब चलता हूँ |
मैं अब चलता हूँ मेरी जाँ की लौटना अब ज़रूरी है 
उसकी चीखें अब कानों तक पोहोंच रही है 
के लौटूँ मैं जोतो आँखें भरना 
तेरा ही हूँ ये सोचके 
इक बार 
मेरे लिए
फिर से खिलखिलाना

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