Pahchaan

और जैसे ही उनके होंठ एक दुसरे की गहराई में खोए ,मानो एक बाँध सा खुल गया । सिया को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि ये उसके साथ क्या हो रहा है। जितना उसका दिमाग उसके जिस्म को दूर करने की कोशिश कर रहा था ,उतना ही उसका शरीर और उसके बस से बहार हो रहा था
धीरे धीरे जैसे ही आराधना ने उसके अंगों को महसूस करना चालू किया , सिया की दुनिया ही बदलती जा रही थी।
तीन दिन पहले जब वो कॉफी पीने के लिए  अपने पास के कैफ़े में आई थी अपने मंगेतर से लड़ाई करके , तो उसका दिमाग शून्य हो चूका था।
एक रिश्ता जो बहुत ही खूबसूरत शाम से चालू हुआ था ,आज एक ऐसी राह पर खड़ा था जहाँ से उसके आगे बढ़ने की सम्भावना एकदम ख़तम हो चुकी थी।  ऐसा नहीं था कि उसे निखिल पसंद नहीं था। वो उसी की चॉइस था लेकिन जिस दिन उन दोनों ने पहली बार शारीरिक  सम्बन्ध बनाने की कोशिश की ,बस उस दिन से इस रिश्ते ने  एक नया रूप धारण कर लिया।
निखिल के नंगे शरीर को छूते ही उसे लगा की वो ये नहीं कर सकती। उसने तुरंत निखिल को अपने से अलग किया और अपने कपडे बदल के वहां से चली गई।
यही कॉफी शॉप में उसकी मुलाकात आराधना से हुई जो यहाँ की मेनेजर थी, जो उसे निहार रही थी जबसे वो शॉप में आई थी।
वो भी बार बार नज़र छुपा के उसे देख रही थी।
और उसे अहसास हो गया कि वो क्या चाहती थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *