Maa By Prachi Agarwal

प्यार बहुत वो करती है फ़र्ज़ अदा सभी करती है
जीवन से घबराती हूँ  हर बार मुझे समझाती है
मुश्किल में डर जाती हूँ उम्मीद मेरी  बन जाती है
हार मेरी  जब होती है कोशिश मुझको सिखलाती है
ऐसी हैं वो पुण्य आत्मा जो मेरी माँ कहलाती हैं
गुस्सा  मैं जब करती हूँ
चुपचाप उसे सह जाती है
अँधेरे से जब डरती हूँ
मशाल मेरी बन जाती है
चोट मुझे जब लगती है
तकलीफ उसे भी होती है
आँख मेरी नम होती  है
दिल उसका भी तो रोता है
ऐसी हैं वो पुण्य आत्मा
जो मेरी माँ कहलाती हैं
मेरी खुशियों की खातिर
वो दुनिया से लड़ जाती है
देख मुझे मायूसी में नींदें उसकी उड़ जाती है
खुद रोकर भी जाने कब वो मेरी हँसी बन जाती है
ऐसी हैं वो पुण्य आत्मा जो मेरी माँ कहलाती हैं
जब मैं उससे कहती हूँ
कैसे करूँ तेरा कर्ज अदा
कैसे करूँ मेरा फर्ज अदा
माँ ऐसी ही होती है ,
बस इतना फिर कह जाती है
बस इतना फिर कह जाती है
ऐसी हैं वो पुण्य आत्मा जो मेरी माँ कहलाती हैं
ऐसी हैं वो पुण्य आत्मा जो मेरी माँ कहलाती हैं

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