शोहरत by Gunjan jhajharia

सूर्य से पहले आँखों की पुतली खोले.

पहली ही किरण से मिला कर नजरें,

इरादों के भाव तोले.

शुन्य में भी जो करोड टटोले,

उसे मिलती है, शोहरत ।

जो ठोकरें सहेजता हो,

तन को निचोड़, मन मरोड़ता हो,

निंद्रा में जीत का अहसास,

जिसके रोंगटे खड़े करता हो,

उसे मिलती है, शोहरत।

भीड़ में जो अपनी छवि देखता हो,,

कर्म को पूजा, लक्ष्य को धर्म कहता हो,

ऊँचाइयों में संभलना जानता हो,

सुगंध के जैसे फैलता हो,

उसे मिलती है शोहरत।

हवा की सर२ में जिसे संगीत सुनाई दे,

आधे भरे गिलास में आधा पानी दिखाई दे,

कुछ कर गुजरने की जिस पर हो धुन सवार ,

उसे मिलती है शोहरत।

मरते बहुत हैं इसकी उडानों पर,

कटते बहुत हैं, इसकी चट्टानों पर,

हल जैसे जुतते हैं,

ऊन के जैसे बुनते हैं।

जिसे मुस्कुराकर ,

बिना थमे चलने की आदत हो,

ना मदद लिए बढ़ने की हिम्मत हो,

खुद को खुदा कहे जो,

उसे मिलती है शोहरत।

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