मैं हूँ एक इंसान, बस यही है मेरी पहचान by Raksha Soni

मैं तो एक रंग में रंगा साँवरे,
वो रंग हैं मेरे राष्ट्र का।

न हूँ हिन्दू, न मैं मुसलमान,
मैं तो गुलाम अपने जज्बात का।

बंदा हूँ खुदा का, भक्त हूँ भगवान का,
मैं हूँ एक इंसान, बस यही है मेरी पहचान।

न बँटा किसी मुल्क में, न बँटा किसी धर्म में,
मैं तो लगा हूँ बस अपने कर्म में।

न हूँ सिख, न मैं ईसाई,
फिर क्यूँ इनके नाम पर हैं हिंसा फैलायी।

आया हूँ दूत शांति का बनकर,
खड़ा हूँ अपना सीना तनकर।

खून मेरा भी लाल हैं,
फिर भी मचा बवाल हैं।

मेरा राष्ट्र ही मेरा धर्म हैं,
उसको बचाना मेरा कर्म हैं।

बंदा हूँ खुदा का, भक्त हूँ भगवान का,
मैं हूँ एक इंसान, बस यही है मेरी पहचान

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